हिमाचल के बल्क ड्रग पार्क प्रोजेक्ट पर संकट, वन विभाग की धीमी रफ्तार से अटक रहा निर्माण कार्य
Himachal's Bulk Drug Park project in jeopardy
शिमला। Himachal's Bulk Drug Park project in jeopardy, हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के हरोली में केंद्र व राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बल्क ड्रग पार्क के निर्माण कार्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इस पार्क को पूरा करने की समय सीमा मार्च 2027 निर्धारित की गई है। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर मिल रही ढील और वन विभाग की सुस्ती के कारण यह प्रोजेक्ट कछुआ गति से चल रहा है।
सबसे बड़ी बाधा पार्क की 700 बीघा भूमि पर खड़े 19 हजार पेड़ बन रहे हैं। उद्योग विभाग द्वारा बार-बार पत्राचार करने और मौखिक रूप से आग्रह किए जाने के बावजूद वन विभाग के आला अधिकारी इस कार्य को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यदि वन विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में तेजी नहीं लाई, तो मार्च 2027 की डेडलाइन के भीतर इस मेगा प्रोजेक्ट को पूरा करना असंभव हो जाएगा।
प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने की आशंका
इस देरी के कारण न केवल प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने की आशंका है, बल्कि प्रदेश में आने वाले करोड़ों रुपये के निवेश और रोजगार के अवसरों में भी देरी हो रही है।
2022 में मिली थी मंजूरी
इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार से वर्ष 2022 के (सितंबर-अक्टूबर) में मंजूरी मिली थ। जिसके बाद से ही इसके शुरुआती सर्वे, प्रशासनिक स्वीकृतियों और बाउंड्री वाल जैसे प्राथमिक कार्यों की शुरुआत कर दी गई थी। हरोली में बन रहा यह बल्क ड्रग पार्क देश के चुनिंदा और बड़े पार्कों में से एक है, जो लगभग 1402 एकड़ (7000 बीघा से अधिक) की विशाल भूमि पर निर्मित किया जा रहा है।
21 हजार में से सिर्फ दो हजार पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी
बल्क ड्रग पार्क के निर्माण के लिए चिन्हित भूमि से कुल 21 हजार पेड़ों को काटा जाना अनिवार्य है। लेकिन वन विभाग की ओर से हो रही भारी देरी के चलते अब तक महज दो हजार पेड़ ही काटे जा सके हैं। अभी भी 19 हजार पेड़ों का कटान बाकी है, जिसके कारण निर्माण से जुड़ी मशीनरी और श्रमिक जमीन पर काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं।
सभी प्रकार की स्वीकृतियां होने के बावजूद वन विभाग की ओर से पार्क निर्माण क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की मार्किंग नहीं की जा रही है। इस संबंध में वन विभाग को कई बार कहा भी जा चुका है, लेकिन तत्परता से काम नहीं हो रहा।
-हर्षवर्धन चौहान, उद्योग मंत्री।